Jhanda Uncha Rahe Hamara

झंडा ऊँचा रहे हमारा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

सदा शक्ति सरसाने वाला,
प्रेम सुधा बरसाने वाला,
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा…

स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जावे भय संकट सारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा…

इस झंडे के नीचे निर्भय,
हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय,
स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा…

आओ प्यारे वीरों आओ,
देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा…

शान न इसकी जाने पावे,
चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।


Jhanda Uncha Rahe Hamara

Vijayi vishwa tiranga pyaara,
Jhanda uncha rahe hamara.

Sada shakti sarsaane waala,
Prem sudha barsaane waala,
Veeron ko harshaane waala,
Maatribhoomi ka tan-man saara.
Jhanda uncha rahe hamara…

Swatantrata ke bheeshan ran mein,
Lakhkar badhe josh kshan-kshan mein,
Kaanpe shatru dekhkar man mein,
Mit jaave bhay sankat saara.
Jhanda uncha rahe hamara…

Is jhande ke neeche nirbhay,
Ho swaraaj janta ka nishchay,
Bolo bhaarat maata ki jay,
Swatantrata hi dhyey hamara.
Jhanda uncha rahe hamara…

Aao pyaare veeron aao,
Desh-jaati par bali-bali jaao,
Ek saath sab milkar gaao,
Pyaara bhaarat desh hamara.
Jhanda uncha rahe hamara…

Shaan na iski jaane paave,
Chaahe jaan bhale hi jaave,
Vishwa-vijay karke dikhlaave,
Tab hove pran poorn hamara.

Vijayi vishwa tiranga pyaara,
Jhanda uncha rahe hamara.


इस गीत से जुड़ी कुछ मुख्य बातें:

झंडा ऊँचा रहे हमारा” (Jhanda Uncha Rahe Hamara) भारत का आधिकारिक ‘ध्वज गीत’ (Flag Song) है। इस ऐतिहासिक और ओजस्वी गीत की रचना स्वतंत्रता सेनानी श्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने मार्च 1924 में की थी। वर्ष 1938 के हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की उपस्थिति में इसे राष्ट्रीय ध्वज गीत के रूप में स्वीकार किया गया था।

  • रचयिता: श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ (कानपुर, उत्तर प्रदेश)
  • महत्व: यह गीत देश के स्वतंत्रता संग्राम के समय आंदोलनों और रैलियों में जोश भरने का सबसे बड़ा माध्यम था। आज भी राष्ट्रीय पर्वों (15 अगस्त और 26 जनवरी) पर ध्वजारोहण के समय इसे अत्यंत सम्मान के साथ गाया जाता है।