Vande Mataram – National Song

वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत Vande Mataram

vande mataram hindi
vande mataram romanized

वन्दे मातरम्॥

Vande Mataram.

वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

कोटि-कोटि कंठ कलकल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
के बोले माँ तुमि अबले!
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्!
वन्दे मातरम्!

तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि माँ शक्ति,
हृदये तुमि माँ भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्!

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमल-दल-विहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वां नमामि कमलाम्,
अमलां अतुलां,
सुजलां सुफलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्!
वन्दे मातरम्!

Vande Mataram!
Sujalam suphalam malayaja-shitalam,
Shasya-shyamalam Mataram!
Vande Mataram!

Shubhra-jyotsna pulakita-yaminim,
Phulla-kusumita drumadala-shobhinim,
Suhasinim sumadhura-bhashinim,
Sukhadam varadam Mataram!
Vande Mataram!

Koti-koti kantha kalakala ninada karale,
Koti-koti bhujair dhrita khara-karavale,
Ke bole Ma tumi abale!
Bahubaladharinim namami tarinim,
Ripudala-varinim Mataram!
Vande Mataram!

Tumi vidya, tumi dharma,
Tumi hridi, tumi marma,
Tvam hi pranah sharire,
Bahute tumi Ma shakti,
Hridaye tumi Ma bhakti,
Tomarai pratima gadhi mandire-mandire.
Vande Mataram!

Tvam hi Durga dashapraharana-dharini,
Kamala kamala-dala-viharini,
Vani vidya-dayini,
Namami tvam namami Kamalam,
Amalam atulam,
Sujalam suphalam Mataram!
Vande Mataram!

Shyamalam saralam susmitam bhushitam,
Dharanim bharanim Mataram!
Vande Mataram!

वन्दे मातरम्: पूर्ण 6पदों का महागीत (The 6 Stanzas) Meaning in Hindi

Stanza – 1

वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

वन्दे मातरम्! हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

तुम निर्मल जल से भरपूर हो, फलों से समृद्ध हो, मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित और शीतल हवा से शीतल हो,

और हरी-भरी फसलों से ढकी हुई हो।हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

वन्दे मातरम्!

Stanza – 2

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

तुम उज्ज्वल चाँदनी से प्रकाशित रात्रियों से सुशोभित हो,
तुम्हारी रातें आनंद और उल्लास से भरी हुई हैं।

तुम खिले हुए फूलों और सुंदर वृक्षों से सजी हुई हो।
तुम्हारे चेहरे पर मधुर मुस्कान है
और तुम्हारी वाणी अत्यंत मधुर है।

तुम सुख देने वाली हो,
तुम वरदान देने वाली हो।

हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

वन्दे मातरम्!

Stanza – 3

कोटि-कोटि कंठ कलकल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
के बोले माँ तुमि अबले!
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्!
वन्दे मातरम्!

करोड़ों कंठों से उठने वाला स्वर
चारों दिशाओं में गूँज रहा है।

करोड़ों भुजाएँ
शक्ति और पराक्रम के साथ खड़ी हैं।

हे माँ, तुम्हें कमजोर कौन कह सकता है?

तुम अपार शक्ति धारण करने वाली हो।
तुम संकटों से पार लगाने वाली हो।
तुम शत्रुओं के समूह का विनाश करने वाली हो।

हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

वन्दे मातरम्!

Stanza – 4

तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि माँ शक्ति,
हृदये तुमि माँ भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्!

तुम ही ज्ञान हो।
तुम ही धर्म हो।
तुम ही हृदय हो।
तुम ही हमारे जीवन का सार हो।

तुम ही हमारे शरीर में जीवन हो।

हमारी भुजाओं में तुम ही शक्ति हो,
और हमारे हृदय में तुम ही भक्ति हो।

हर मंदिर में
हम तुम्हारी प्रतिमा बनाकर तुम्हारी पूजा करते हैं।

हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

वन्दे मातरम्!

Stanza – 5

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमल-दल-विहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वां नमामि कमलाम्,
अमलां अतुलां,
सुजलां सुफलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

तुम ही दुर्गा हो,
दस प्रकार के अस्त्र धारण करने वाली शक्तिशाली देवी।

तुम ही कमला अर्थात लक्ष्मी हो,
जो कमल पर विराजमान होती हो।

तुम ही वाणी अर्थात सरस्वती हो,
जो ज्ञान प्रदान करने वाली हो।

मैं तुम्हें नमन करता हूँ।
मैं तुम्हें नमन करता हूँ, हे कमला!

तुम निर्मल हो,
तुम अतुलनीय हो।

तुम निर्मल जल से भरपूर हो,
और फलों से समृद्ध हो।

हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

वन्दे मातरम्!

Stanza – 6

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्!
वन्दे मातरम्!

तुम हरी-भरी हो,
सरल और सहज हो,
मधुर मुस्कान से सुशोभित हो
और सुंदरता से अलंकृत हो।

तुम हमारी धरती हो,
हमारा पालन-पोषण करने वाली हो।

हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

वन्दे मातरम्!


Vande Mataram

वन्दे मातरम् — इतिहास

Vande Mataram by Bankim Chand Chattopadhyay

“वन्दे मातरम्” भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में प्रतिष्ठित एक ऐतिहासिक रचना है। इसके रचयिता महान बंगाली साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय थे।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, वन्दे मातरम् की रचना लगभग 1875 में हुई मानी जाती है। 2025 में इसकी रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर भारत सरकार ने इसके सम्मान में वर्षभर चलने वाला राष्ट्रीय आयोजन भी शुरू किया।

बंकिमचंद्र ने भारतभूमि को माँ के रूप में देखते हुए इस गीत में मातृभूमि के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की भावना व्यक्त की। बाद में यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास “आनंदमठ” में शामिल हुआ, जो 1882 में पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ।

स्वतंत्रता आंदोलन में वन्दे मातरम्

धीरे-धीरे “वन्दे मातरम्” केवल एक गीत नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन का एक शक्तिशाली नारा बन गया। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध होने वाले आंदोलनों, सभाओं और जुलूसों में लोग इसे गाते और इसका उद्घोष करते थे। विशेष रूप से 1905 के बंगाल विभाजन के विरोध और स्वदेशी आंदोलन में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

1896 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में वन्दे मातरम् गाया। इसके बाद कांग्रेस के अनेक अधिवेशनों में इसके प्रारंभिक दो पद गाए जाने लगे।

वन्दे मातरम् की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि “वन्दे मातरम्” स्वयं स्वतंत्रता सेनानियों और आंदोलनकारियों का उद्घोष बन गया। ब्रिटिश अधिकारियों ने कई स्थानों पर इसके सार्वजनिक गायन और उद्घोष पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया।

राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान

स्वतंत्र भारत में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि स्वतंत्रता संग्राम में वन्दे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए इसे राष्ट्रगान “जन गण मन” के समान सम्मान दिया जाएगा।

इस प्रकार “जन गण मन” भारत का राष्ट्रगान है, जबकि “वन्दे मातरम्” भारत का राष्ट्रीय गीत है।

वन्दे मातरम् का महत्व

वन्दे मातरम् की सबसे बड़ी शक्ति इसकी मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना में है। यह उस समय भारतीयों के भीतर राष्ट्रीय चेतना जगाने वाली रचना बनी, जब देश विदेशी शासन के अधीन था।

आज भी “वन्दे मातरम्” केवल एक ऐतिहासिक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता की स्मृति, मातृभूमि के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।