Jahan Daal Daal Par Sone ki Chidiya

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया

गुरुर ब्रह्मा, गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वरा
गुरुर साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा… (टेक)

जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा…

यह धरती वो जहाँ ऋषि-मुनि जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आकर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा…

अलबेलों की इस भूमि पर नित्य नई दीवाली
यहाँ का हर दिन एक उत्सव है, हर रात है रात सुहानी
जहाँ राम-रहीम की वाणी में गूँजे भोर का सवेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा… जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा…

Jahan Daal Daal Par Sone Ki Chidiya

Gurur Brahma, Gurur Vishnu, Gurur Devo Maheshwara
Gurur Saakshaat Parabrahma, Tasmai Shri Guruve Namah

Jahan daal-daal par sone ki chidiya karti hai basera
Woh bhaarat desh hai mera, woh bhaarat desh hai mera… (Refrain)

Jahan satya, ahimsa aur dharm ka pag-pag lagta dera
Woh bhaarat desh hai mera, woh bhaarat desh hai mera…

Yeh dharti woh jahan rishi-muni japte prabhu naam ki maala
Jahan har baalak ek mohan hai aur radha har ek baala
Jahan sooraj sabse pehle aakar daale apna phera
Woh bhaarat desh hai mera, woh bhaarat desh hai mera…

Albelon ki is bhoomi par nitya nayi deewali
Yahan ka har din ek utsav hai, har raat hai raat suhaani
Jahan ram-rahim ki vaani mein goonje bhor ka savera
Woh bhaarat desh hai mera, woh bhaarat desh hai mera…

Jahan daal-daal par sone ki chidiya karti hai basera
Woh bhaarat desh hai mera, woh bhaarat desh hai mera…


“जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा” भारत की महान सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक समृद्धि और सहिष्णुता को दर्शाने वाला एक बेहद मधुर और अमर देशभक्ति गीत है। प्रसिद्ध गीतकार क़मर जलालाबादी द्वारा रचित इस गीत को मोहम्मद रफ़ी ने अपनी जादुई आवाज़ से सजाया था।

इस गीत से जुड़ी कुछ मुख्य बातें (Short Facts):

  • फ़िल्म (Movie): सिकंदर-ए-आज़म (1965)
  • गीतकार (Lyricist): क़मर जलालाबादी
  • संगीतकार (Music Director): हंसराज बहल
  • गायक (Singer): मोहम्मद रफ़ी
  • महत्व: यह गीत भारत को प्राचीन काल में कहे जाने वाले ‘सोने की चिड़िया’ के प्रतीक को बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। इसमें देश की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ यहाँ के आध्यात्मिक और सामाजिक सद्भाव (राम-रहीम की सांझी विरासत) की अनूठी झलक मिलती है।