Gayatri Mantra

ॐ भूर्भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥

हिंदी उच्चारण (Hindi Lyrics)

ओम् भूर्भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Om Bhur Bhuvah Svah |
Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dheemahi |
Dhiyo Yo Nah Prachodayat ||


सरल शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Breakdown):

  • ॐ (Om): परब्रह्म, ईश्वर की मुख्य ध्वनि।
  • भूर्भुवः स्वः (Bhur Bhuvah Svah): प्राणस्वरूप, दुःखनाशक और सुखस्वरूप (तीनों लोक—भूलोक, भुवर्लोक, स्वरलोक)।
  • तत् (Tat): उस।
  • सवितुः (Savitur): सूर्य देव / प्रकाशक / जनक (सृष्टि के निर्माता)।
  • वरेण्यं (Varenyam): पूजनीय, वरण करने योग्य या सर्वश्रेष्ठ।
  • भर्गो (Bhargo): अज्ञान और पापों को नष्ट करने वाला दिव्य प्रकाश।
  • देवस्य (Devasya): प्रभु का / भगवान का।
  • धीमहि (Dheemahi): हम ध्यान करते हैं।
  • धियो (Dhiyo): बुद्धि को / विचारों को।
  • यो (Yo): जो (परमात्मा)।
  • नः (Nah): हमारी।
  • प्रचोदयात् (Prachodayat): सन्मार्ग पर प्रेरित करे / सही दिशा में आगे बढ़ाए।

पूर्ण भावार्थ (Comprehensive Meaning):

हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, पापों को नष्ट करने वाले दिव्य स्वरूप सूर्य देव (सच्चिदानंद परमात्मा) का ध्यान करते हैं, जिन्होंने इस संपूर्ण ब्रह्मांड को रचा है। हम उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे हमारे भीतर की अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर हमारी बुद्धि और विचारों को सन्मार्ग (सही मार्ग) पर प्रेरित करें।

अक्सर लोग गायत्री मंत्र को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मानते हैं, लेकिन व्यावहारिक जीवन में यह विशुद्ध रूप से ‘बौद्धिक कल्याण’ (Intellectual Wellness) का एक वैज्ञानिक सूत्र है। यह मंत्र भगवान से कोई धन या भौतिक वस्तु नहीं मांगता, बल्कि यह हमारी बुद्धि को प्रखर (Sharp) करने की प्रार्थना है। जब आपकी सोचने की शक्ति स्वतंत्र और स्पष्ट होती है, तो जीवन की हर मुश्किल परिस्थिति अपने आप सरल हो जाती है।